हैप्पी न्यू इयर
नए साल की आप सब को बहुत बहुत बधाइयाँ | बहुत खुशियाँ आनंद, मौज, मेले, मस्तियों से तुंहारा जीवन भरपूर हो जाये | जीवन आनंदमय, मंगलमय हो जाये,
अन्दर से यही भाव आप सब के लिए आ रहे हैं |सभी इतनी ठण्ड में, कोहरे में परिश्रम करके यहाँ आये हैं , इस महफ़िल की शोभा बढाने के लिए.
दादा की बगिया बहुत खूबसूरत लग रही हैं.
यहाँ से बैठ कर देखो उचाई से
सभी फूल खिले दिखाई दे रहे हैं.
मौसम भी अच्छा हो रहा हैं, ईश्वर की कृपा से.'
शरद ऋतू भाग्य से आती हैं शीतलता लाने के लिए.
सब ऋतुओ का अपना महत्व हैं.
परमात्मा हर दिन मौज मस्ती से भरा लाता हैं.
जीवन के कितने घंटे मिले हैं. पिछला वर्ष आनंद में बीता, सभी के जीवन में खूब उपलब्धियां हुई.
कल इस विषय में चर्चा चली थी. सब ने अपना आनंद बताया,
nine में निश्चय किया , nothing is mine. हर परिसिथिथि का सामना किया, यह हमारे सतगुरु की महान कृपा हैं.कैसे एक एक के ह्रदय में प्रवेश करके उसको पूरी तरह से परिवर्तित कर देते हैं, complete change. केवल कथाएं, पुराने बातें नहीं हैं हमारे यहाँ. विस्मृति का पाठ पढ़ा के हमारा जीवन नया बना देते हैं. हर दिन उत्सव किउ तरह बीतता हैं. सबके जीवन में आनंद की लहरें उमढ रही हैं. रात को भी सब नाचें, गाये, अपनी ओमंग पूरी की. कितना मजेदार ज्ञान हैं. किसी चीज़ की रोक टोक नहीं हैं तुमको. सब मिल जुल कर प्रेम की न सौगातें बाटते हैं | बहार की सौगातें तो आज मिलेगी , वह कल पुरानी हो जाएगी | प्रेम नया रहता हैं | प्रेम अमिट चाप बनके हरेक के ह्रदय में उसके जीवन का रूप बन जाता हैं जो इस जीवन के पोषण के लिए सब से ज्यादा आवश्यक चीज़ हैं | हरेक प्रेम के लिए तरसता हैं , प्रेम की कमी सब के जीवन में रहती हैं | लेकिन यह दर ऐसा हैं यहाँ ना जाम कोई मांगता हैं, फिर भी भर भर के पिलाते हैं, तृप्त होते हैं और नाचते लगते हैं | हर कार्य गीत गाते गाते हो जाता हैं, पता ही नहीं चलता | जीवन हल्का हो गया हैं, तनाव व् भार हट गए हैं |सारे जीवन में लगता हैं कितनी मुश्किलातों का सामना करना परेगा लेकिन गुरु के प्रेम मैं मुश्किल आसान हो गयी हैं | नयी उमंग और नयी presentation हैं | पुरुषार्थ से भरा जीवन हैं | नीरसता को bye bye कर दी हैं , और आलस्य को अलविदा कर दिया हैं | सब के जीवन में परिपूर्णता हैं | नया वर्ष आज से शुरू हुआ हैं. 10 complete figure हैं. 1 से 9 तक अधुरा होता हैं, लेकिन एक शुन्य की महानता भरपूर कर देती हैं| एक और उके आगे शून्य ( ० ) . जब तुम एक ब्रह्म में स्थिर हो जाते हैं , तो माया शुन्य हो जाती हैं. यदि जीवन में शुन्य ना होता तो गिनती नौ तक ही रह जाती. ना दस बनता, न सौ बनते , न हजार बनते, न लाख बनते, और ना ही करोढ़ बनते , लेकिन शुन्य के अंक ने विस्तार कर दिया |
जब हम गए सत्सुंग में तो गीता भगवान् ने बोला तुम एक एक मिल के केवल दस बनाना | आज आप बताइए कितने हो ? यह दस से सौ , हज़ार, लाख, करोढ़ और करोर्हों बन गए हैं| सब की महनत हैं . सब का प्यार बढ़ता ही जा रहा हैं. जब अहम् शुन्य हो तो प्यार बढ़ता हैं | अहंकार आनंद नहीं लेने देता हैं. में के डंडे को गिराना पढता हैं| जन्म से पहले तू शुन्य था , फिर कुछ बन गया ! दुनिया वालो ने बेटा , बेटी, माँ , बहन के लेबल लगा दिए | रिश्ते नातें जुढ़ गए , व् हम भी मानते चले गए | जाना नहीं कैसे ?
मानते मानते गिर गए | गुरु ने कहाँ इस को कैसे छुढ़ाएं , यह तो फसतें ही चले जा रहे हैं . परिवार बन गया, मन अटकता गया और दुखी होता गया | गुरु ने बोला अभी ठहरो, वापस हो जाओ.
परिवार बन गया , मन ताकता गया और दुखी होता गया | गुरु ने बोला अभी ठहरो , वापस हो जाओ | जितने लेबल लगे हैं मिटाते जाओ | वापस उस्सी स्वरुप में आ जाओ , जहाँ जनम से पहले थे | तब तू कुछ नहीं था , शून्य था , निराकार था | निराकार था तो आनंद था . आज भी हरेक इस्सी प्रयत्न में लगा हुआन हैं और इस साल यदि तुम्हे कोई बनाये तो शून्य को याद कर लेना | जब diary में डेट लिखोगे तो शून्य लिखोगे , तब याद करना तुम्हे होना है “Be Nothing”. हमारे दादाजी का मंत्र हैं “Be nothing and Do nothing”. जो be nothing हो जाता हैं , उसका विस्तार हो जाता हैं . बीज मिट कर महान वृक्ष हो जाता हैं | कैसे अपने महान हाथो से अपनी छाया में समाते लेता हैं . सबके लिए फल , फूल और oxygen देना शुरू कर देता हैं | शून्य होने के बाद ही दिया जा सकता हैं | बनकर बैठते हैं तो लगता हैं दे रहे हैं , पर हैरानी होती हैं , सबकुछ देते हुवे भी दुखी हैं | रिश्तदारों को देते हैं , पर वेह सब कुछ लेने के बाद भी प्रसन्नता ज़ाहिर नहीं करते - इसको अधिक व् इसको कम दे दिया बोलते हैं , ऐसा किया , व् ऐसा ना किया बोलते हैं | लेने वाले को भरपूरता नहीं हैं तथा देने वाले को भी “satisfaction” नहीं हैं . क्यूँ उसे देने के बाद भी कमी दिखाई देती हैं . और अपने अन्दर भी भरपूरता नहीं आती हैं . पत्नी और बच्चो से प्यार करते हैं , तोह भी व्हो कहते हैं तुम पूरा प्यार नहीं करते हो | मुझे कम् करते हो , फलाने को ज्यादा करते हो | जब तक जीव बने हो , तब तक आनंद नहीं आयेगा | हम देकर खली हो जाते हैं पर ख़ुशी नहीं आती हैं . ग्यानी का बाटते बाटते भी धन कम नहीं होता हैं , व् बात कर खुश होता हैं एंड दान देने से कम धन नहीं होता हैं | सांसारिक धन तो हज़ार दो तो कहते हैं लाख से कम दिया हैं और लाख दो तो कहते हैं करोड़ से कम दिया हैं . हज़ार रूपये दिए तो तुम्हारे तो कम हो ही गए | मीरा ने बोला दिन -दिन बढ़त सवायो , पायो जी मैंने राम रत्तन धन पायो | मीरा पुजारिन थी किस राम की ? कहती हैं राम रतन धन पायो , कृष्ण रतन धन नहीं बोला | शून्य में पहुँच गयी . कृष्ण के वियोग में दो की पीढ़ा थी , विरह था | रो रो के कहती हैं , जो मैं ऐसा जानती प्रीत किये दुःख होए , नगर धिन्दोरा पीटती , प्रीत न करियो कोए | उसे समझ देने वाला कोई नहीं था | दो में खालीपन हैं , आनंद व् ख़ुशी नहीं हैं | जीवन खाली खाली हैं , विलाप हैं | फिर कहते हैं – अकेले हो गए | हर व्यक्ति के पास अथाह धन , दौलत , चल व् अचल संपत्ति हैं , फिर भी कहता हैं मेरा घर खाली हैं | अन्दर में सूनापन हैं क्यों की अन्दर से द्वैत हटा नहीं | जब तक शून्यता में नहीं आते , अद्वैत या जेरो में नहीं आते तो दुखी होते हो | मिटता दे अपनी हस्ती को अगर तू मर्तबा चाहे , की दाना खाख में मिल कर गुल्ले गुलज़ार होता हैं | दस्तूरे मोहब्बत बस हैं यही हस्ती को मित्तना पढ़ता हैं | जब तक हस्ती हैं तो मस्ती नहीं हैं | हस्ती ने सच्ची मस्ती से दूर किया हैं | अताम्रस तभी पी व् पिला सकते हैं जब अपने आप को गुम्म कर दो | देने वाले बनोगे या पीने वाले बनोगे तो भी तृप्ति नहीं आयेगी | में दे रहा हूँ , या में निष्काम करने जा रहा हूँ बोलना ही गलत हैं | निष्काम मतलब ही “No ” करम . तू तू-तू क्यों करता हैं | तुम्हारे भक्ति की , करम की , ज्ञान की – तीनो की परह्कश्ता हैं शून्य में आना | ज्ञान में अहम् को मित्तना हैं , भक्ति में तू-तू करके अपने को मित्ताना हैं , और कर्म में ना अहम् करता मन्ना हैं | जब तक करता भाव रहेगा , देने वाला व् लेने वाला दो बन गए तो आनंद नहीं आएगा | आनंद को प्रगट करने के लिए द्वैत का नाश करना हैं | बुध भगवान् से किसी ने पुछा , की क्या हर व्यक्ति मोक्ष , आनंद को प्राप्त कर सकता हैं ? उन्होंने कहाँ , क्यों नहीं ? पर बीज मित्त्ने को राजी हो तब | डिब्बे में बीज नहीं मिटेगा , उसे धरती का आश्रय लेना परेगा | जब अपने को धरती में गुम करता हैं तभी वृक्ष पैदा होता हैं | मनुष्य भी अपने को गुम करेगा तभी मोक्ष प्राप्त करेगा | हर व्यक्ति को धन दौलत चाहिए | सब कहते हैं , परिस्थितियाँ सहीं हो जाए <>
दूसरा देखते हैं तो तनाव आता हैं | दूसरा देखना ही नरक हैं “other is hell” हम दूसरा देख कर गुण दोष देखेंगे , अच्छा बूरा देखेंगे , अपना पराया देखेंगे |सुधारने की कोशिश करेंगे , सबको बनाने के चक्कर में रहेंगे | दादा ने कहा अपने को बना लो | बच्चे ने मनुष्य का चित्र बनाया तो “world map” बन गया . जिसने स्वयं को बनाया , उसके लिए दुनिया में कोई बिग्ग्रा हैं ही नहीं | कोई बुरा नहीं हैं भले मन के वास्ते | मेरे कामिल , मेरे मुर्शिद ने मेरी दृष्टि सुधार दी | क्या दृष्टि मतलब “See God everywhere”. “Everything is God and everywhere is God , there is nothing but God”. परमात्मा का दर्शन कहाँ से करना हैं ? तू व् परमात्मा दो नहीं हैं . दो में दर्शन होता हैं | स्वामी रामतीर्थ ने बोला दर्शन शब्द ही गलत हैं | अतम अनुभव होता हैं | दर्शन में तू और में की हस्ती गुम नहीं होती | “know thyself and you know God”. इश्वर को भी जान ने की ज़रूरत नहीं हैं , केवल स्वयं को जान लो | एक बूँद से सागर को जान लेते हो . जो पिन्द्दे सो ब्रह्मान्द्दे , जो ब्रह्मांडे सो पिन्द्दे . बूँद में जो हैं वो पूरे सागर में व्यापक हैं एंड तुम्हारी एक बूँद से पूरे खून की जांच हो जाती हैं | बूँद समायी समुन्दर में , यह जाने हर कोई , पर समुन्द्र समाया बूँद में , यह जाने बिरला कोई | पूरी “world” तुम्हारे अन्दर हैं और “lord” इसी में छुपा हैं | तुम बोलते हो क्यों अकेले भेजा इस श्रृष्टि में . तुम झाँक कर देखो शक्ति किसकी हैं ? क्रिया हो रही हैं , कार्य हो रहा हैं , करने वाली शक्ति और हैं , बोलने वाला और हैं | बोलने वाला अहंकार करता हैं . फिर ममता बनती हैं , उसी से करता भाव होता हैं . | जो जाने में कुछ करता , तब लग गर्भ जून में फिरता | जहाँ भी में आ जाए , उसे मित्ताओ | बोलते हो मैकने सब के साथ अच्छा किया , में सयाना हूँ , अक्ल वाला हूँ | कल भी एक भजन गाने लगी - तन वाराह की में मन वारा , की की वराह . मैंने कहाँ तेरा हैं क्या ? सब चोरी का माल हैं . कोई बोले की मैं तुम्हे लखनऊ का बनारसी बाघ गिफ्ट में देता हूँ , तो क्या व् तुम्हारा हैं .? कुछ भी करके मन फिर फिर मैं मैं करता है | बस एक सावधानी की जरुरत है | तुम सावधान है तो तुम गिर नहीं सकते हो | जाग्रत हो के रहो | दादा ने कहा आत्मा जाग्रति रहे , “awareness” रहे | कारन करावन अपने आप मानुष के कुछ नहीं हाथ | मानुष के करतब व्यर्थ ही जाते है | न कर अब तू मेरा मेरा , टूटेगा अभिमान ये तेरा | “Last” में हाथ खाली कर देते है | कितना एकत्रित किया वह यहीं रहेगा | इश्वर की चीजो को आपना बनाते है | चोरी प्रभु की करते है | कहते है , मेरा ये दुकान , घर , मकान , बेटा , “फैक्ट्री ” देखिये | आज मेरे घर का मुहरत है चलिए , “inauguration” कीजिये , “Ribbon” काटिए | हम कहते है देह अध्यास काटो तो अपने असली घर में जाओ | अपने मैं की “ribbon” काटो | कौन से मैं , किसकी मैं | क्या थे हम पहले ? माँ के गर्भ मैं आने से पहले क्या थे , कहा थे , पूछो अपने आप से ? शक्ति कहा से आयी ? शक्ति अनाज से आये , अनाज वृष्टि से आया , वेह वृष्टि परमात्मा से आये तो तुम परमात्मा से आये | बीज मंत्र सर्व को ज्ञान | सब का ज्ञान एक ही है बीज | परमात्मा को जानना है , शक्ति को जानना है , जो आज भी तुम्हारे अन्दर ही है | अव्यक्त से व्यक्त हुआ वाही व्यक्ति हुआ | आँख बंद करके देखो तो यह सारा द्रेश्यमान जगत गयाब हो जाये | क्या दिखाई देगा | एको ब्रह्म द्वीतीय नस्ती | जहा तक जाती दृष्टि है , जहा तक फैली श्रृष्टि है , सर्व मम रूप है | शक्ति को देखो तो जगत मिथ्या हो जाये | ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या यह हिन्दुओं का महा व्याक्या है | ब्रह्म दिखे गा – विन आंकहें वेखो – नानक ने कहा | दिव्य द्रष्टि से ब्रह्म दिखेगा , चमरे की आँखों से चमरा दिखेगा जो बेकार है | जिस ने तत्त्व को जाना उसे तत्त्व ज्ञानी कहते है | जो स्वयं तत्त्व में खरा ह i वही तत्त्व तक पहुंचा सकता है | दिन रात गुरु की एक ही नेमत है की मेरे जैसा हो जाये | “as you know, as I am, So shall you be|” मत पर – मेरे जैसे हो जाओ | दुनियां में कोई गुरु अपने जैसा नहीं बनाना चाहता | बाप भी बेटे को गद्दी नहीं देता है | शेर बिल्ली से सारे गुण सीख गया तो बिल्ली के पीछे पर गया | बिल्ली PER पर चढ़ गई | बोली तू मुझ को खा जाता इस लिए एक गुण तुमसे छुपाया . गुरु पात्र में पूरा उड़ेल देता है | भोजन कहाँ डालोगे ? पात्र में ही डालोगे || गुरु को भी स्वच्छ , पवित्र , साफ़ दिल वाले चाहिए | “Be clean rather than claver”| जितने “clean” बनोगे उतनी तुम्हें ख़ुशी आएगी | ज्ञान भी स्वयं के लिए है | मत कहो मैंने बहुत “deciples” बनाये | ना ही ठाकुर ना ही दास | दादा ने कहा अज्ञानी समझ के ज्ञान मत देना | दादा से पूछा की क्या आप भी हमें अज्ञानी देख कर ज्ञान देते हो ? सूरज अंधकार देख कर उजाला देता है क्या ? ज्ञान अंजन गुरु दिया , अज्ञान अंधेर विनाश | गुरु के सामने आते ही तुम्हारा अहंकार खो जाता है | नमक की पुतली सागर का अंत लेने चली गयी , आज दिन तक लौट कर नहीं आयी | कपरे की गुडिया गीली हो गयी और पत्थर की गुडिया ठंडी हो गयी | अब तुम लोग खोज के बताओ नमक की गुडिया कहाँ गयी | तुम भी शून्य हो जाओगे , गुम हो जाओगे | आप सारा महबूब की सूरत , गुम हो के वेख नजारा | तुम्हें जब तक अन्दर में ख्याल है की में आज नमाज पढ़ रहा हूँ तो नमाज सच्ची नहीं है | पढने वाला खो जाये | बनना बनाना खत्म हो जाये | ना में तन ही रहा , ना में मन ही रहा , सतगुरु मिलने से झगरा खत्म हो गया | तुम्हारे प्रश्न “solve” नहीं होते , तुम ही “dissolve” हो जाते हो | रोज अपने को “ dissolve” करो | जब चीनी अपने को मिटाती है तो शरबत में मिठास आती है | बर्फ बनी है तो तक तक की आवाज करती है और जब घुल जाती है तो वही बर्फ ठंडक देती है | और मन की एक बात पकर लेना की मन गुम होना नहीं चाहता | इतने बना लिए , अब तो कुछ मेरा नाम हो | मन को बनने में कुछ आनंद आता है , फिर फिर बनता है | तुम बार बार अपने को गुम करो , यह साधना है | जप , तप साधन , पूजा , पाठ , ध्यान , धारणा, समाधि गुरु कुछ नहीं सिखाता | ज्ञान सुन कर अपने आप को विलीन कर दो | मैं मैं ना रहूं तू तू ना रहे , हम राम में ऐसे रम जाये | पानी में मिले जैसे नमक डली हम राम में ऐसे रम जाएँ | गुम होनें मैं मजा है या बनने में मजा है ? “Vote” किस को देते है ? है पक्का ------- हम यहाँ से आये , हम वहां से आये , आज हम जा रहें है ---- तू है ही नहीं | तुम ही गुम हो जाओ | आप गवाइये ता सव पाइए और कैसी चतुराई | अपने आप को समर्पित कर दो l जब शरण मैं आते हो तो गुरु के कंठ में बैठ जाते हो , गुरु तुम्हारा ही गीत गाता है | जब व्यापक वस्तू पहचान लिया , सब भ्रम का भंडा फोर दिया | हद हद चला हर कोई , बेहद चला ना कोई | बेहद के बाजार में खरा कबीरा रोए | ये है बेहद | जब तक बर्फ “melt” नहीं हुई तब तक हद है | जिस दिन तुम्हारी देह गुम हो जाएगी , उस दिन तुम्हारी हद खत्म हो जायेगी | “beginning less, endless, death less birth less” कितने “less” दादा ने बता दिए | अपने को “less” करते चेलो | “ he is a brave man who can say no”| कुछ भी बनानने में “no” करो | माँ , बाप , भाई , बेटा कुछ नहीं बनो | बनना ही है अज्ञान बार , चाहे जीव बनो या इश बनो | यह रहस्य जान लो तो जीवन सफल हो जाये | में हो आनंद का ही स्वरुप | केवल आनंद , उस में में नहीं जोड़ो | बोलने वाला भी खो जाए | दो ही ना हो | सब विश्व मटियामेट करदो | मिट जाओ नहीं तो मिटा देये जाओगे | ख़ुशी से मिटो वरना कल मिटे देगा | खुद मिटने में मजा है या काल से मिटने में ? समय बहुत बलवान है , एक दिन मिटा देगा | आया कुछ समझ में ------ ?
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